श्रीशिवप्रातःस्मरणस्तोत्रम्
प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं
गङ्गाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम् |
खट्ट्वङ्गशूलवरदाभयहस्तमीशं
संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥ १ ॥
जो सांसारिक भय को हरने वाले और देवताओं के स्वामी हैं, जो गंगाजी को धारण करते हैं, जिनका वृषभ वाहन हैं, जो अम्बिका के ईश है, तथा जिनके हाथ में खट्वांग त्रिशूल और वरद तथा अभयमुद्रा है, उन संसार-रोग को हरने के निमित्त अद्वितीय औषधरूप ईश (महादेवजी) का मैं प्रातः समय में स्मरण करता हूँ।

