मंगल देवता
भारतीय ज्योतिष में मंगल इसी नाम के ग्रह के लिये प्रयोग किया जाता है। इस ग्रह
को अंगारक (यानि अंगारे जैसा रक्त वर्ण), भौम (यानि भूमि पुत्र) भी कहा जाता है।
मंगल युद्ध का देवता कहलाता है । यह ग्रह मेष एवं वृश्चिक राशियों का स्वामी कहलाता
है। मंगल रुचक महापुरुष योग या मनोगत विज्ञान का प्रदाता माना जाता है। इसे रक्त या
लाल वर्ण में दिखाया जाता है एवं यह त्रिशूल, गदा, पद्म और भाला या शूल धारण किये
दर्शाया जाता है। पत्नी का नाम ज्वालिनी देवी तथा इसका वाहन भेड़ होता है एवं
सप्तवारों में यह मंगलवार का शासक कहलाता है।
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Saturday, December 8, 2018
Thursday, December 6, 2018
कार्तिकेय या मुरुगन
कार्तिकेय या मुरुगन
कार्तिकेय या मुरुगन, एक लोकप्रिय हिन्दु देव हैं और इनके अधिकतर भक्त तमिल हिन्दू हैं। इनकी पूजा मुख्यत: भारत के दक्षिणी राज्यों और विशेषकर तमिल नाडु में की जाती है इसके अतिरिक्त विश्व में जहाँ कहीं भी तमिल निवासी/प्रवासी रहते हैं जैसे कि श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर आदि में भी यह पूजे जाते हैं। इनके छ: सबसे प्रसिद्ध मंदिर तमिल नाडु में स्थित हैं। तमिल इन्हें तमिल कडवुल यानि कि तमिलों के देवता कह कर संबोधित करते हैं। यह भारत के तमिलनाडु राज्य के रक्षक देव भी हैं। अरब में यजीदी जाति के लोग भी इन्हें पूजते हैं, ये उनके प्रमुख देवता हैं। उत्तरी ध्रुव के निकटवर्ती प्रदेश उत्तर कुरु के क्षेत्र विशेष में ही इन्होंने स्कंद नाम से शासन किया था। इनके नाम पर ही स्कंद पुराण है।
Saturday, November 24, 2018
अश्विनीकुमार
देवता विश्वकर्मा को
त्वष्टा भी कहा जाता है। उनकी पुत्री का नाम
संज्ञा था। संज्ञा
को कहीं-कहीं प्रभा
भी कहा गया है। विश्वकर्मा ने अपनी इस पुत्री का विवाह
भगवान
सूर्य से कर दिया। विवाह के बाद संज्ञा ने
वैवस्वत और यम नामक दो पुत्रों और
यमुना
नामक एक पुत्री को जन्म दिया। संज्ञा बड़े कोमल स्वभाव की थी, जबकि सूर्य प्रचंड
स्वभाव के थे। ऐसे में बड़े कष्टों के साथ संज्ञा सूर्यदेव के तेज को सहन कर रही
थी। जब यह सब असहनीय हो गया तो वह अपनी
छाया को सूर्यदेव की सेवा में छोड़कर अपने
पिता के घर लौट गई। बहुत दिनों बाद पिता विश्वकर्मा ने उसे अपने पति के घर लौटने को
कहा, लेकिन वह वहां नहीं जाना चाहती थी। तब वह उत्तरकुरु नामक स्थान (उत्तरी ध्रुव
के पास) पर घोड़ी का रूप बनाकर तपस्या करने लगी। इधर सूर्यदेव, संज्ञा की छाया को
ही संज्ञा समझते थे। एक दिन छाया ने किसी बात से क्रोधित होकर संज्ञा के पुत्र यम
को शाप दे दिया। शाप से भयभीत होकर यम अपने पिता सूर्य के पास गए और माता द्वारा
शाप देने की बात बताई।माता ने अपने पुत्र को शाप दे दिया, यह सुनकर सूर्य को छाया
पर संदेह होने लगा। तब सूर्य ने छाया को बुलाकर उसकी सच्चाई जाननी चाही। छाया ने जब
कुछ नहीं बताया और वह चुप रह गई, तब सूर्यदेव उसे शाप देने को तैयार हो गए। ऐसे में
भयभीत छाया ने सब कुछ सच-सच बता दिया।
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